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पुरुष ईगो से निपटने के लिए जाह्नवी कपूर अपनाती हैं खास रणनीति बोलीं इंडस्ट्री में मेल ईगो बहुत ज़्यादा है

बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने हाल ही में इंडस्ट्री के एक संवेदनशील और व्यापक मुद्दे पर खुलकर बात करके ध्यान आ

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बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने हाल ही में इंडस्ट्री के एक संवेदनशील और व्यापक मुद्दे पर खुलकर बात करके ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि अपने करियर के दौरान उन्हें फिल्म जगत में कई बार पुरुषों के अहंकार (Male Ego) का सामना करना पड़ा है। एक इंटरव्यू में बात करते हुए जाह्नवी ने इस बात का खुलासा किया कि इस तरह के अहंकार से निपटने के लिए उन्होंने एक अनोखी और शायद आत्म-सुरक्षात्मक रणनीति अपनाई है, जिसके तहत वह कई बार 'बेवकूफ' बनने का नाटक करती हैं। उनका यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के काम करने के अनुभव और उन्हें जिन अदृश्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उस पर प्रकाश डालता है।


जाह्नवी कपूर ने विस्तार से बताया कि जब उन्हें लगता है कि उनके पुरुष सहकर्मी या इंडस्ट्री के लोग उनके साथ बातचीत में या काम के दौरान 'ईगो' दिखा रहे हैं, तो वह जानबूझकर खुद को थोड़ा कम जानकार या 'बेवकूफ' के रूप में पेश करती हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उस पुरुष का अहंकार संतुष्ट हो जाता है, और यह एक तरह से उनके काम को आसान बनाता है। यह रणनीति उन्हें अनावश्यक टकराव से बचाती है और उन्हें अपने काम पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देती है। जाह्नवी के इस कबूलनामे से यह स्पष्ट होता है कि बॉलीवुड में पुरुषों का दबदबा और उनका अहंकार आज भी एक बड़ी चुनौती है, जिसे महिला कलाकारों को अपने तरीके से संभालना पड़ता है।


जाह्नवी ने यह भी कहा कि शुरुआत में वह इन स्थितियों से जूझती थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें यह महसूस हुआ कि इस 'ईगो' को मैनेज करने का सबसे आसान तरीका है कि आप उन्हें यह महसूस कराएं कि आप उनके लिए खतरा नहीं हैं। एक तरह से यह उनके लिए एक 'सर्वाइवल मैकेनिज्म' बन गया है। यह सिर्फ जाह्नवी कपूर का व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री की कई अन्य अभिनेत्रियाँ भी अक्सर इस तरह के शक्ति संतुलन और पुरुषों के वर्चस्व वाले माहौल पर अपनी राय व्यक्त कर चुकी हैं। यह दर्शाता है कि एक महिला होने के नाते, खासकर एक सफल अभिनेत्री होने के नाते, उन्हें न केवल अपनी एक्टिंग पर ध्यान देना पड़ता है, बल्कि सेट पर सामाजिक और भावनात्मक गतिशीलता को भी संभालना पड़ता है।


जाह्नवी कपूर का यह बयान महिला कलाकारों की उस दोहरी लड़ाई को दर्शाता है जो उन्हें लड़नी पड़ती है – एक तो पर्दे पर खुद को साबित करने की और दूसरी पर्दे के पीछे इंडस्ट्री के सामाजिक ढांचे से जूझने की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह माहौल बदलेगा और महिला कलाकारों को केवल उनके काम के आधार पर जज किया जाएगा, न कि उन्हें पुरुष सहकर्मियों के अहंकार को साधने के लिए कोई नाटक करना पड़ेगा। उनका यह साहसी बयान निश्चित रूप से बॉलीवुड में कार्यस्थल की संस्कृति पर एक स्वस्थ चर्चा शुरू करने में मदद करेगा।


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